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महाराष्ट्र में तीन दलों (शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी) के गठबंधन वाली महाविकास आघाड़ी सरकार की दीवारें दरकने लगी
June 11, 2020 • ASHWANI JAISWAL • राजनीति

महाराष्ट्र में तीन दलों (शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी) के गठबंधन वाली महाविकास आघाड़ी सरकार की दीवारें दरकने लगी हैं। गुरुवार को कांग्रेस ने पहली बार खुलकर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई है। प्रदेश कांग्रेस नेताओं के बीच बीते दो दिन से अंदरखाने बैठक शुरू है लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने गुरुवार को ठाकरे सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।

दरअसल, महाराष्ट्र की सत्ता में शामिल होते हुए भी कांग्रेस को उतना महत्व नहीं मिल रहा है जितने की वह हकदार है। शिवसेना अध्यक्ष व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और महाविकास आघाड़ी सरकार के शिल्पकार एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार किसी भी मुद्दे पर आपस में चर्चा कर निर्णय ले लेते हैं जबकि कांग्रेस को इसमें शामिल करने की जरूरत भी नहीं महसूस की जाती। यही वजह है कि पिछले दिनों इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि महाराष्ट्र में कांग्रेस शामिल जरूर है लेकिन किसी निर्णय प्रक्रिया में उनके नेताओं की सलाह नहीं ली जाती। उसके बाद उद्धव ठाकरे से राहुल गांधी की हुई टेलिफोनिक वार्ता में सबकुछ ठीक होने की बात सामने आई थी। खुद सीएम ठाकरे ने राहुल गांधी को आश्वासन दिया था कि कांग्रेस को सरकार में पूरा सम्मान दिया जाएगा।
निर्णय प्रक्रिया में पूरी भागीदारी चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस के एक मंत्री ने बताया कि कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की बैठक में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि तीन दलों की सरकार में कांग्रेस को भी बराबर सम्मान मिलना चाहिए और सरकारकी निर्णय प्रक्रिया में कांग्रेस की भी भागीदारी होनी चाहिए। इधर, ठाकरे सरकार में एनसीपी दिन प्रतिदिन भारी पड़ती जा रही है। कांग्रेस नेताओं को यह खटक रहा है और इससे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी है। इस बीच कांग्रेस के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने के लिए शिवसेना सचिव व मुख्यमंत्री के निजी सचिव मिलिंद नार्वेकर के साथ बैठक की।  

शिवसेना के लिए पांच सीटे छोड़ने को तैयार नहीं कांग्रेस-एनसीपी
सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बाला साहेब थोरात व प्रदेश एनसीपी अध्यक्ष जयंत पाटील ने मुख्यमंत्री से विधान परिषद की राज्यपाल नामित 12 सीटों के लिए नामों को अंतिम रूप देने के लिए बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। लेकिन अभी तक यह बैठक नहीं हो सकी। विधान परिषद के राज्यपाल मनोनित 8 सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि 2 सदस्यों का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो जाएगा। 2 सीट इस्तीफे के चलते पहले से रिक्त हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सरकार के गठन के समय ही यह तय हो चुका है कि तीनों दलों में से प्रत्येक को विधानपरिषद की चार-चार सीटें मिलेंगी। लेकिन अब शिवसेना पांच सीटों पर दावा कर रही है, जो कांग्रेस-एनसीपी को स्वीकार नहीं होगा।

बाला साहेब थोरात, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष-राजस्व मंत्री
       हमारे बीच असहमति के कई मुद्दे हैं। सरकार की निर्णय प्रक्रिया में कांग्रेस को विश्वास में लिया जाना चाहिए। जल्द ही इस विषय में भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात करेंगे।