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लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी रीयल एस्टेट की परियोजनाएं नहीं पकड़ नहीं पकड़ रही रफ्तार
September 26, 2020 • ASHWANI JAISWAL • उत्तर प्रदेश

लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी रीयल एस्टेट की परियोजनाएं रफ्तार नहीं पकड़ रही हैं। लिहाजा सरकार इसे पटरी पर लाने के लिए उद्योगों की तरह कई तरह की रियायतें देने पर विचार कर रही है। इस बाबत आवास आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति के सुझाव के आधार पर रीयल एस्टेट की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और बढ़ती लागत को कम करने के लिए बिल्डरों को छूट का एलान किया जा सकता है।

हाल ही बिल्डरों के प्रमुख संगठन क्रेडाई के पदाधिकारियों के साथ शासन के उच्चाधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें बिल्डरों की समस्याओं पर विचार किया गया था। इस दौरान क्रेडाई ने रीयल एस्टेट की परियोजनाओं को महामारी व आपदा प्रबंधन कानून के तहत होने वाली कार्यवाही से मुक्त रखने की मांग की थी। क्योंकि इसकी वजह से उन्हें श्रमिक नहीं मिल रहे हैं और परियोजनाओं की रफ्तार लगभग थम गई है। इसके बाद सरकार ने आवास आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाकर प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है।
 
यूपी क्रेडाई के संयुक्त सचिव रमनदीप के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से परियोजनाओं का देर होना सामान्य है। इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार होना चाहिए। रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) पहले ही छह महीने का ग्रेस पीरियड परियोजनाओं को पूरा करने के लिए दे चुकी है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि प्रमोटर्स कुछ और समय चाहते हैं।
'परियोजना पूरा करने का समय तय किया जाए'
उधर, क्रेडाई के पदाधिकारियों में कई की यह राय थी कि सबके लिए चुनौतियां अलग-अलग है। लिहाजा सबके लिए एक नियम बनाने के बजाय प्रमोटर से पूछकर उसके मुताबिक परियोजना पूरा करने का समय तय किया जाए। वहीं, यह भी मांग की गई है कि दूसरे प्रदेशों से आने वाले स्किल्ड लेबर को साइट तक लाने में कोई व्यवधान न पैदा किया जाए। सूत्रों का कहना है कि इन सुझावों को प्रस्ताव में शामिल किया जा सकता है।

उधर, आवास विभाग के एक उच्चपदस्थ सूत्र के मुताबिक रीयल एस्टेट परियोजनाओं को शुरू कराने के लिए सरकार क्रेडाई की ज्यादातर मांगों को मान लेगी। इसके तहत अगर काम करने वाली साइट्स पर कोई मजदूर कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो इसके लिए बिल्डर पर आपराधिक मुकदमा नहीं दर्ज कराया जाएगा।